प्रधान मंत्री की अटल पेंशन योजना

पूरे देश में शुरू हुई योजना

केंद्र सरकार और मुख्यमंत्रियों ने एक साथ 9 मई को अटल पेंशन योजना एवं अन्य बीमा योजनाओं की शुरुआत की। भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में योजना का विधिवत लोकार्पण किया। यह उद्घाटन कार्यक्रम देशभर के 116 स्थानों पर हुआ। इनमें राज्यों की राजधानियां, जिला मुख्यालय आदि शामिल हैं। 11 मई 2015 तक इस योजना से 41,124 लोग जुड़ चुके हैं।

अटल पेंशन योजना की पूरी जानकारी

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने फरवरी 2015 के बजट भाषण में कहा था- “दुखद है कि जब हमारी युवा पीढ़ी बूढ़ी होगी उसके पास भी कोई पेंशन नहीं होगी। प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता से प्रोत्साहित होकर, मैं सभी भारतीयों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के सृजन का प्रस्ताव करता हूं। इससे सुनिश्चित होगा कि किसी भी भारतीय नागरिक को बीमारी, दुर्घटना या वृद्धावस्था में अभाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।” इसे आदर्श बनाते हुए राष्ट्रीय पेंशन योजना के तौर पर अटल पेंशन योजना एक जून 2015 से प्रभावी होगी। इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को पेंशन फायदों के दायरे में लाना है। इससे उन्हें हर महीने न्यूनतम भागीदारी के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी।

निजी क्षेत्र में या ऐसे पेशों से जुड़े लोग जिन्हें पेंशन लाभ नहीं मिलते, वे भी इस योजना में पेंशन के लिए आवेदन दे सकते हैं। वे 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर 1,000 या 2,000 या 3,000 या 4,000 या 5,000 रुपए की स्थायी पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं। अंशदान की राशि और व्यक्ति की उम्र के आधार पर ही पेंशन तय होगी। अंशदाता की मौत होने पर, अंशदाता का जीवनसाथी पेंशन का दावा कर सकता है और जीवनसाथी की मौत के बाद नॉमिनी को अर्जित राशि लौटा दी जाएगी।

सरकार द्वारा निर्धारित निवेश पैटर्न के आधार पर पेंशन फंड्स इस योजना के तहत संग्रहित राशि का प्रबंधन करेंगे। व्यक्तिगत आवेदकों के पास पेंशन फंड्स या निवेश आवंटन चुनने का कोई अधिकार नहीं होगा।

अटल पेंशन योजना के लाभ

अटल पेंशन योजना बूढ़े होते भारतीयों के लिए सुरक्षा लाई है, जबकि इसके साथ ही समाज के निम्न और निम्न मध्य वर्ग के तबकों में बचत और निवेश की संस्कृति को प्रोत्साहित भी करती है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका फायदा समाज के गरीब से गरीब तबके का व्यक्ति भी ले सकता है। भारत सरकार ने पांच साल तक हर साल हर अंशदाता के अंशदान का 50 प्रतिशत या 1,000 रुपए (जो भी कम हो) का योगदान देने का फैसला किया है। यह अंशदान सिर्फ उन्हें ही मिलेगा, जो आयकर नहीं चुकाते और जो इस योजना में 31 दिसंबर 2015 से पहले शामिल हो जाएंगे।

कौन पात्र है?

अटल पेंशन योजना (एपीवाय) 18 से 40 वर्ष आयु समूह के सभी भारतीयों के लिए है। हर व्यक्ति को कम से कम 20 साल तक अंशदान देना होगा, तभी उसे इस योजना का लाभ मिल सकेगा। कोई भी बैंक खाताधारी, जो किसी भी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना का सदस्य न हो, इस योजना का लाभ उठा सकता है।

सरकार के ‘स्वावलंबन योजना एनपीएस लाइट’ के सभी सदस्य खुद-ब-खुद अटल पेंशन योजना में शिफ्ट हो जाएंगे। यह योजना स्वावलंबन योजना की जगह ले लेगी, जिसे देशभर में ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिल सकी।

पंजीयन कैसे कराएं?

अटल पेंशन योजना के लिए पंजीकरण कराने हेतु हर खाताधारी को अथॉराइजेशन फॉर्म भरकर अपने बैंक में जमा कराना होगा। इस फॉर्म में खाता नंबर, जीवनसाथी और नॉमिनी का विवरण लिखकर देना होगा। अथाॅराइजेषन पत्र भरना होगा, जिससे आप बैंक की योजना के लिए अंषदान की राषि के आहरण का अधिकार दे देंगे। इस योजना के तहत पंजीकृत खाताधारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर महीने उसके खाते में निर्धारित रुपए होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं कर सके तो मासिक जुर्माना वसूला जाएगा-

100 रुपए तक के मासिक अंशदान पर एक रुपया
101 से 500 रुपए तक के मासिक अंशदान पर दो रुपए
501 से 1,000 रुपए तक के मासिक अंशदान पर पांच रुपए।
1,001 से ज्यादा मासिक अंशदान पर 10 रुपए।

अटल पेंशन योजना के नियम

छह महीने तक जमा नहीं किया तो खाताधारी का खाता सील कर लिया जाएगा।
12 महीने तक जमा नहीं किया, तो खाताधारी का खाता निष्क्रिय कर दिया जाएगा।
24 महीने तक जमा नहीं किया तो खाताधारी के खाते को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

उनके लिए जिनका कोई बैंक खाता नहीं हैः किसी भी व्यक्ति को सबसे पहले बैंक अकाउंट खोलना होगा। इसके लिए आधार कार्ड और केवायसी की जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है। उस व्यक्ति को साथ में एपीवाय का प्रपोजल फॉर्म भी जमा कराना होगा।
योजना से बाहर निकलनाः सामान्य परिस्थितियों में, अटल पेंशन योजना के लिए पंजीकृत एक खाताधारी अटल पेंशन योजना से 60 साल की उम्र तक बाहर नहीं निकल सकता। सिर्फ विशेष परिस्थिति में ही खाता बंद किया जा सकता है, जैसे कि हितग्राही की मौत की स्थिति में।

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